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ईसाई धर्मान्तरण का एक कुत्सित तरीका- प्रार्थना से चंगाई

हिन्दू समाज सदा से शांति प्रिय समाज रहा हैं. विश्व इतिहास इस बात का प्रबल प्रमाण हैं, वही ईसाई हिन्दुओ को येशु की भेड़ बनाने के लिए पैसे से, नौकरी से, शिक्षा से अथवा प्रार्थना से चंगाई के पाखंड का तरीका अपना रहे हैं.

हिन्दू समाज सदा से शांति प्रिय समाज रहा हैं. विश्व इतिहास इस बात का प्रबल प्रमाण हैं, मुस्लिम समाज ने जहाँ तलवार के बल पर हिन्दुओं को इस्लाम में शामिल करने की कोशिश करी थी , अब सूफियो की कब्रों पर हिन्दू शीश झुकाकर या लव जिहाद या ज्यादा बच्चे बनाकर भारत की सम्पन्नता और अखंडता को चुनोती देने की कोशिश कर रहे हैं, वही ईसाई हिन्दुओ को येशु की भेड़ बनाने के लिए पैसे से, नौकरी से, शिक्षा से अथवा प्रार्थना से चंगाई के पाखंड का तरीका अपना रहे हैं. सबसे पहले ईसाई समाज अपने किसी व्यक्ति को संत घोषित करके उसमे चमत्कार की शक्ति होने का दावा करते हैं. चूँकि विदेशो में ईसाई चर्च बंद होकर बिकने लगे हैं और भोगवाद की लहर में ईसाई मत मृतप्राय हो गया हैं इसलिए भारत के हिन्दुओं से ईसाई धर्म की रक्षा का एक सुनहरा सपना वेटिकन के पोप द्वारा देखा गया हैं. इसी श्रृंखला में सोची समझी रणनीति के तहत भारत से दो हस्तियों को ननसे संत का दर्जा दिया गया हैं पहले मदर टेरेसा और बाद में सिस्टर अलफोंसो को संत बनाया गया. दोनों के लिए किसी गरीब को जिसके पास इलाज करवाने के लिए पैसे नहीं थे , जो की बेसहारा थी, उनको दर्शाया गया की प्रार्थना से उनकी चंगाई हो गयी और वे ठीक हो गए, यह एक संत के चमत्कार से हुआ इसलिए प्रभु येशु का धन्यवादकरना चाहिए और ईसाइयत को स्वीकारकरना चाहिए क्योंकि पगान देवता जैसे राम और कृष्ण में चंगाई की शक्ति नहीं हैं नहीं तो आप अभी तकठीक हो गए होते. मदर टेरेसा , दया की मूर्ति, कोलकाता के सभी गरीबो को भोजन देने वाली, सभी बेसहारा बच्चो को आश्रय देने वाली, जिसने अपने देश को छोड़ कर भारत के गटरों से निर्धनों को सहारा दिया ऐसी हस्ती जो की नोबेल पुरस्कार विजेता हैं एक नन से संत बना दी गयी की उनकी हकीकत से कम ही लोग वाकिफ हैं. जब मोरारजी देसाई की सरकार में धर्मांतरण के विरुद्ध बिल पेश हुआ तो इन्ही मदर टेरेसा ने प्रधान मंत्री को पत्र लिख कर कहाँ था की ईसाई समाज सभी समाज सेवा की गतिविधिया जैसे की शिक्षा, रोजगार , अनाथालय आदि को बंद कर देगा अगर उन्हें अपने ईसाई मत का प्रचार करने से रोका गया. तब प्रधान मंत्री देसाई ने कहाँ था इसका मतलब ईसाई मत द्वारा की जा रही समाज सेवा एक दिखावा भर हैं उनका असली प्रयोजनतो धर्मान्तरण हैं. यही मदर टेरेसा दिल्ली में दलित ईसाईयों के लिए आरक्षण की हिमायतकरने के लिए धरने पर बैठी थी.प्रार्थना से चंगाई में विश्वास रखने वाली मदर टेरेसा खुद विदेश जाकर तीन बार आँखों एवं दिल की शल्य चिकित्सा करवा चुकी थी. क्या उनको प्रभु इशु अथवा अन्य ईसाई संतो की प्रार्थना कर चंगा होने का विश्वास नहीं था? आगे सिस्टर अलफोंसो की बात करते हैं वे जीवन भर करीब २० वर्ष तक स्वयं अनेक रोगों से ग्रस्त रही .उन्हें भी संत का दर्जा दे दिया गया. और यह प्रचारित कर दिया गया की उनकी प्रार्थना से भी चंगाई हो जाती हैं. यह सब प्रचारित करने वाले पोप जॉन पॉल स्वयं पार्किन्सन रोग सेपीड़ित थे और चलने फिरने में भी असमर्थ थे. उन्होंने भी इन दोनों संतो की पनाह नहीं ली. क्या उन्हें इन संतो द्वारा प्रार्थना करने से चंगाई होने परविश्वास नहीं था? इस लेख का मुख्या उद्देश्य आपस में वैमनस्य फैलाना नहीं हैं बल्कि पाखंड खंडन हैं . ईसाई समाज को जो अपने आपको पढ़ा लिखा समाज समझता हैं इस प्रकार के पाखंड में विश्वास रखता हैं यह बड़ी विडम्बना हैं. सत्य यह हैं की प्रार्थना से चंगाई एक मुर्ख बनाने का तरीका हैं जो की केवल और केवल हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन करने का तरीका हैं. मेरा सभी हिन्दू भाइयों से अनुरोध हैं की ईसाई समाज के इस कुत्सित तरीके की पोल खोल कर हिन्दू समाज की रक्षा करे. और सबसे आवश्यक अगर किसी गरीब हिन्दू को ईलाज के लिए मदद की जरुरत हो तो उसकी धन आदि से अवश्यसहयोग करे जिससे वह ईसाईयों से बचा रहे.

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Comments:
[2011-11-24 19:17] Sunil kumar:

Bhai aap jo bhi ho sabse pahle mujhe ye bata ki tu hindu he lekin tu jo baat kar raha he isayi samaj ki lekin kabhi tune jesus k bare me jana he ? Or tu sant logo ko jhutha manta he to koi bat nahi kyonki tu abhi nahi janta . Tumko live example k liye log on kare- http://www.jesuscalls.org jyada icchha ho to mujhe mail karna - veer143sani@gmail.com kabhi mujhe dekhna ho to batana ki main kon hindu, muslim, sikh, ya christhian ok

[2011-11-25 01:50] Raju:

Sabse pahle mai ye batana chahta hun ki mai kisi ki burai nahi kar raha, mai to vastavikta ko prastut kar raha hun. Aur agar vastav me isayi samaj k man me khot nahi tha to धर्मातँरण बिल से उन्हें क्यों भय उत्पन्न हुआ Aur rahi baat God ki to use apna karya karne k liye kisi madhyam ki jarurat nahi hoti . Aur nahi uska koe 1 son hai balki hum sab uski santan hai. Ye to apki bhool hai ki jesus k bina kisi ki mukti nahi hogi. Aur yadi ap real god ko janana chahte to 1 bar satyarth prakash jarur padhe .

[2011-12-02 03:59] Sunil:

Kya hua bhai log kisi ka reply nahi aaya

[2011-11-21 05:49] परवेज:

बिलकुल ठीक कहा भाई ये सिर्फ हिन्दू समाज के साथ ही नही बल्कि पूरे देश को बेवकूफ बना रहे हैं ।

[2011-11-22 23:13] Vijay:

YESHU MASIH HI JAGAT KA MUKTI DAATA HAI-"yeshu masih ne kaha marg,satya aur jeevan main hi hoona, bina mere dwara koi swarg nahi pahuch sakta"

[2012-01-14 07:22] पंडित धर्म प्रकाश शर्मा:

ईसाई धर्म केवल चमत्कारों पर निर्भर नहीं है , जिसे आप चमत्कारों के खिलाफ चार लाईन लिख कर ईसाइयों के खिलाफ हिन्दुओं को भड़काकर श्रेष्टता साबित करेंगे | यदि आप जीवन भर भी अच्छे काम करेंगे तो मदर टेरेशा के एक घंटे की सेवा कार्य नहीं कर सकते | भारत सरकार अगर मदर टेरेशा को संत मानती है या संत का दर्ज़ा देती है तो कुछ असामाजिक तत्व हिन्दू धर्म की आड़ में उन्हें और ईसाई धर्म को क्यों भला बुरा समझते है | क्या ईश्वर से प्रार्थना करना गलत है ? क्या गरीब दुखी लाचार लोगों को शिक्षा देना गलत है ? मै तो कहता हूँ आज सभी को सच्चा ईसाई होने की जरुरत है| कहाँ जात- पात का हिन्दू धर्म में लगे हो | ईस्वर ने सभी को सामान बनाया है आगे बढ़ो और उखाड़ फेको मनु वादी हिन्दू धर्म को जहाँ आदिवासी और हरिज़नो को छोटी जाती कहकर आज भी प्रताड़ित किया जाता है | उन्हें पशु से ज्यादा दर्ज़ा नहीं दिया जाता | आवो हम आज से प्रण लें बाबा आंबेडकर के तर्ज़ पर दुनिया का कोई भी धर्म मानो पर हिन्दू धर्म नहीं | हिन्दू धर्म को धर्म कहना ही पाप है, जहाँ नर संहार करके उसे वदध या मुक्ति देना कहा जाता है | यदि किसी को जान से मारना धर्म है तो हिन्दू धर्म से ज्यादा अच्छा तो आतंकवादी या नक्षलवादी हैं जो प्रति दिन हिन्दू धर्म के तर्ज़ पर कितनो को मुक्ति दे रहे हैं | उनकी सेवा करो या उनका अनुसरण करो | मै हिन्दू धर्म के खिलाप नहीं पर ऐसी लेखन के खिलाफ हूँ जो दुसरे धर्म को छोटा बता कर अपना उल्लू सीधा करते हैं | यह मात्र ऐसे असामाजिक तत्वों को आइना दिखने मात्र छोटी सी कतरा है | पढ़ने के लिए धन्यवाद्.
पंडित धर्म प्रकाश शर्मा | पुष्कर ...

[2011-11-25 02:04] Irfan reja:

@vijay and sunil answere these question प्रार्थना से चंगाई में विश्वास रखने वाली मदर टेरेसा खुद विदेश जाकर तीन बार आँखों एवं दिल की शल्य चिकित्सा करवा चुकी थी. क्या उनको प्रभु इशु अथवा अन्य ईसाई संतो की प्रार्थना कर चंगा होने का विश्वास नहीं था? सिस्टर अलफोंसो जीवन भर करीब २० वर्ष तक स्वयं अनेक रोगों से ग्रस्त रही .उन्हें भी संत का दर्जा दे दिया गया. और यह प्रचारित कर दिया गया की उनकी प्रार्थना से भी चंगाई हो जाती हैं. यह सब प्रचारित करने वाले पोप जॉन पॉल स्वयं पार्किन्सन रोग से पीड़ित थे और चलने फिरने में भी असमर्थ थे. उन्होंने भी इन दोनों संतो की पनाह नहीं ली. क्याउन्हें इन संतो द्वारा प्रार्थना करने से चंगाई होने परविश्वास नहीं था? Aur rahi baat ye blog kisi Bible ya Dharm granth se nahi liya gaya balki History se liya gaya hai jo matra 25 saal purani aur jag jahir hai. Pahale blog ko samjho phir answere do.

[2011-11-29 03:54] Sunil:

Bhai mere agar tumko jita jagta live example chahiye to 1 jesus par yakin kar ke dekh lo. Apke saare answer khud b khud mil jayenge maine isliye nahi likha ki tumne unke santo k naam se se apko pareshani ho rahi he balki isliye likha ki agar jindgi main kuch sachai dekhna chahte ho to khud ko practical karna hoga mere dost. Kyonki padne or karne main swarg or narak ya zameen or asman ka antar hota he pahle khud karo uske baad bolo. Or rahi baat samaj ki to jo log samaj ko mante he to jara tum puch kar aana ki jab duniya shuru hui thi to kon samaj lekar aaya bhagwan ki hum log kyonki agar jis bhagwan ne samaj ka naam lekar prachar kiya he wo bhagwan ho hi nahi sakta kyonki baap apne bacho se bhetbhav nahi karta saare samajo jaisa. Apne baad dada par dada ya usse bhi purana raja maharaja ya adam k jamane ko koi ho to us se puch lena pad lena or phir blog likhna. Or 1 baat or ki jesus ne puri bible main kabhi christian dharm k baare me nahi bataya he ki tum dharm apna o . Balki ye kaha he ki apna man badlo paap se punya ki or agar aap log kuch or samajhte ho sab logo ki biogrophay dekhkar to ye apki sabse badi haar he kyonki aap khud ko nahi jan paye lekin dusron ki burai chatne me piche bhi nahi rahe ok

[2011-12-06 02:10] Irfan neja:

@ Sunil. bhai Ap is blog k mool prashan se hat rahe hai. Aur rahi baat samaj ki to samaj ki suruwat isayiyon ne ki. Pehle dharm k name per Yahodiyon ka khoon bahaya. Fir ISAYI samaj ko badhane k liye sab prayas kiye. Aur rahi practical ki baat to agli post me wo bhi kara dunga.

[2011-12-18 08:42] M. HANIF:

Maine blog padha, bilkul sachai se paripurn hai. Isayi samaj ko India me bahar deshon se funding hoti h.Dharm prachar kr


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