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रात की घटना को याद कर तरह – तरह के विचारो में खोये मनोज को पता ही नहीं चला की कब अंजली उसके कमरे में आ गई. अचानक अंजली को पता नहीं क्या शरारत सुझी उसने चुपके से विचारो में खोये मनोज की आँखो को अपने दोनो हाथो की हथेली से दबाई तो मनोज ने जैसे ही अपनी आंखों को दबा रखी हथेलियों का स्पर्श कियातो वह जोर से चीख पड़ा. अचानक मनोज के जोर से चीख कर बेहोश हो जाने से अंजलि बुरी तरह घबरा गई. बेहोश हुए मनोज की उससे हालत देखी नहीं गई. वह मनोज की हालत देखकर थर-थर कांपने लगी. उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक मनोज को ऐसा क्या हो गया…..? मनोज की चीख को सुन कर उसके पड़ौस में रहने वाली अनुराधा दौड़ीचली आई. मनोज की चीख इतनी जोर की थी कि आसपास के लोग भी घबरा कर मनोज के पास दौड़ कर चले आये.बड़े दिन की छुट्टïी खत्म होने वाली थी. स्कूल-कालेज लगना शुरू होने वाले थे. इस बीच अपने गांव से जल्दी लौट आये मनोज को अब सर पर सवार परीक्षा की तैयारी में जुट जाना था. अर्ध वार्षिक परीक्षा के बाद होनेवाली पढ़ाई में जरा सी भी बरती ढील पूरा साल बरबाद कर सकती थी. सुबह जल्दी न उठ पाने की आदत के कारण मनोज ने अपने मकान मालिक से कहा था किअंकल आप जब भी मार्निंग वाक के लिये जाते हैं मुझे भी साथलेते चलिये मैं भी साथ चलूंगा. पिछले कई सालों से मनोज के मकान मालिक कुंदन मैथ्यू मार्निंग वाक के लियेजाते थे. मनोज ने सोचा कि वह सुबह चार से साढ़े पांच बजे तक मार्निंग वाक के बहानें अपनी किताबें-कापियां लेकर शांति से खुले मैदान में बैठकर पढ़ लेगा. एक पंथ दो काज के बहाने से सुबह देर से जगने की परेशानी से भी मुक्ति मिल जाएगी. अपने कमरे में सोने जाने से पहले मनोज ने एक बार फिर याद दिलाते हुये कहा कि अंकल रात से मैं भी आपके साथ चलूंगा. मनोज का कमरा ऊपर की मंजिल परहोने की वजह से तीन चार दोस्तसाथ मिलकर रहा करते थे. मनोज के सहपाठी आज शाम तक वापस लौटकर आने का कह कर गये थे लेकिन जब वे नहीं आये तो आज शाम को ही अपने गांव से वापस लौटे मनोज को आज की रात अकेले ही काटनी थी. इसलिये वह ज्यादा देर तक जगने के बजाय सोने चलागया. 31दिसंबर की उस रात अपने कमरे में अकेले सोये मनोज ने उस रात को जोर की पडऩे वाली ठंड से बचने के लिएअपने सारे गर्म कपड़े पहनने के बाद अपने गांव से अबकी बारसाथ लाई जयपुरी मखमली रजाई को अपने ऊपर डाल कर उसकी गर्माहट में दुबक कर सो गया. सपनों की दुनिया में खोये मनोज की अचानक हुई खटपट की आवाज से नींद खुल गई. उसने अपने कमरे का नाइट लैम्प जलाया तो उसे अचानक नाइट बल्ब की रोशनी में जो दिखाई दिया उससे वह बुरी तरह डर गया. उसे अपने कमरे में एक भयानक डरावनी सूरत वाली कालीबिल्ली दिखाई दी. जिसकी आँखो से अंगारे बरस रहे थे. उस काली भयावह डरावनी सूरत वालीबिल्ली से वह कुछ पल के लिये डर गया लेकिन उसने हिम्मत से काम लेते हुए उस बिल्ली को भगाने के लिए डंडा तलाशना चाहा , लेकिन उसे जब कहीं भी डंडा दिखाई नहीं दिया इस बीच डंडा तलाशते समय उसकी न$जर अनायास सामने की ओर बने सेंट पाल चर्च की ओर गई तो उसका कलेजा कांप गया. उसने अपने ऊपर की मंजिल पर स्थित कमरे से देखा कि रात के समय आसमानीतारों की जगमग रोशनी में उस चर्च के सामने बनी बावली के भीतर से एक महिला निकल कर उसके मकान की ओर आती दिखाई दी. सफेद लिबास पहनी वह महिलाउसके मकान मालिक कुंदन मैथ्यू के कमरे की ओर आती दिखाई दी वह महिला आई महिला बिना कुछ बोले उसके मकान मालिक के कमरे में चली गई. उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था कि उसने अभी कुछ देर पहले क्या देखा. आखिरवह महिला कौन थी. उसका इस मकान मालिक से क्या नाता-रिश्ता है. वह यहां पर इतनी रात को क्या करने आई है……? और न जाने कितने प्रकार के विचारों में खोए मनोज का डर के मारे बुरा हाल था. अगर वह बिस्तर पर जाकर नहीं बैठता तो वह बुरी तरह लडख़ड़ा कर गिर जाता.मनोज ने जैसे – तैसे पूरी रातको अपनी आँखे के सामने कांटा.उसका एक- एक पल उसे सालो की तरह लग रहा था. सुबह होते ही जब उसके मकान मालिक कुंदन मैथ्यू ने उसे घूमने के लिये चलने को कहा तो उसने पेट दर्दका बहाना बना कर वह अपने बिस्तर में दुबक कर सो गया. उसकी आंखों की नींद उड़ गई थीवह बार-बार यही सोचता रहा कि उस बावली से निकलने वाली महिला कौन थी? उसका इस मकान मालिक से क्या संबंध है? सवालों में उलझे मनोज ने किसी तरह दिन निकलते तक का समय काट लिया पर वह रात की घटना से परेशान हो गया. दिन भर बेचैन मनोज जब आज कॉलेज भीनहीं आया तो उसके मकान मालिक ने उससे आखिर पूछ लिया-बेटा मनोज क्या बात है? तुम्हारा पेट दर्द क्या अब भी कम नहीं हुआ है? अगर तकलीफ अभी भी है तो डाक्टर के पास चलो मैं तुम्हें ले चलता हंू. नहीं अंकल ऐसी कोई बात नहीं है, बस यूं ही इच्छा नहीं हो रही है. आप चिंता न करें मैं ठीक हंू यह कह कर मनोज अपने कमरे से बाहर निकल कर आ गया. रात की घटना को याद करता विचारों में खोये मनोज की अचानक किसी ने आंखों पर हथेली रखकर उसकी आंखोंं को दबा दिया. मनोज ने जैसे ही आंखों को दबा रखी हथेलियों का स्पर्श किया तो वह चीख पड़ा और वह कटे वृक्ष की भॉति जमीन पर धड़ाम से गिरपड़ा. मनोज के चीख कर बेहोश गिर जाने से अंजलि बुरी तरह घबरा गई. वह मनोज की हालत देखकर थर-थर कांप रही थी. उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक मनोज को क्या हो गया. मनोज की चीख को सुनकर आसपास के लोग घबरा कर मनोज केपास दौड़ कर चले आये. कुछ ही पल में पूरा मोहल्ला जमा हो गया. किसी के कुछ समझ नहीं आ रहा था. अंजलि का तो हाल बेहाल था. कुछ लोग मनोज को उठाकर उसके कमरे में ले गये.
Bahut acchi kahani he good
Yes
nice 1
Nice
Kahi kahanika patra mai to nahi,kahani dilchasp hai.
Not Horror
थे. कालेज की केन्टीन से शुरू हुये अंजलि और मनोज के प्रेम प्रसंग ने उन्हें पूरे कालेज में चर्चित कर रखा था. पुलिस कप्तान की बिटिया होने की वजह से हर कोई उसके आसपास आनेसे डरता था. वह अक्सर मनोज से मिलने आती थी. पिछले चार-पांचमाह से दोनों के बीच चल रहे प्रेम प्रसंग की पूरी कालोनीमें चर्चा होती थी. लोग चर्च कालोनी के इन दोनों प्रेमियों की तुलना हिर-रांझा, लैला-मजनू, सोनी-महिवाल से करते थे. अंजलि शहर के पुलिस कप्तान की बिटिया थी इसलिये कोई भी उसके बारे में बुरा भला कह पाने की हिम्मत नहीं कर पाते थे. कई बार तो कप्तान की कार ही मनोज को लेने आती थी. पूरे मोहल्ले में मनोज का जलवा था.अंजलि की मम्मी को ब्लड कैंसर की बीमारी थी. जिसकी वजह से वह असमय ही काल के गाल में समा गई थी. अंजलि की मम्मी का जब निधन हुआ था उस समय वह छ: माह की थी, ठाकुर महेन्द्र प्रताप सिंह पर परिवार के लोगों का काफी दबाव आया कि वे दूसरी शादी करलें, पर कप्तान साहब अपनी जिंदगी में किसी दूसरी औरत को आज तक आने नहीं दिया. अंजलि ही उसके जीने का एक मात्र सहारा थी. जब अंजलि के बीच प्रेम प्रसंग की उन्हें खबर मिली तो सबसे पहले कप्तान साहब ने बिना किसी को कुछ बताये मनोज के पूरे परिवार की जन्म कुंडली अपने मित्र से मंगवा ली थी. मनोज के घर परिवार के तथा उसके आचार विचार ने पुलिस कप्तान का दिल जीत लिया था. पुलिस कप्तान ने मनोज को अपना भावी दामाद बनाने का फैसला कर लिया था. अगले वर्ष दोनों का विवाह कर उनका घर संसार बसा देने का फैसला ठाकुर महेन्द्र प्रतापसिंह तथा मनोज के पापा के बीच हो चुका था लेकिन दोनों के बीच की बातचीत को अभी गुप्त रखा था. इस बात का न अंजलि को पता था और ना ही मनोज को आभास था कि उसके पापा और अंजलि के डैडी के बीच कोई बातचीत भी हुई है.
अंजलि की खबर मिलते ही पुलिसकप्तान दौड़े चले आए. उनके साथ शहर का पुलिस विभाग भी आगे-पीछे दौड़ा च
़ा चला आया. ठाकुर महेन्द्र प्रताप सिंह की बिटिया संकट में है यह खबरसुन कर भला कौन चुप बैठ सकता था. सबसे ज्यादा हैरान – परेशान अखबार और टी.वी. चैनल वाले थे क्येकि उन्हे आपस में इस बात का डर सता रहा था कि कहीं उनकी खबर आने के पहलेही कोई ब्रेकिंग न्यूज न चला दे. शहर में सनसनी खेज खबर के घट जाने के चलते सारे मीडिया कर्मी ठाकुर महेन्द्र प्रताप सिंह को खोजते कुन्दनमैथ्यू के घर पर आ धमके. सेंट पाल चर्च कालोनी की इस घटना की चर्चा शहर के पान ठेलो एवंहोटलो तथा चाक चौराहो पर होने लगी. कुन्दन मैथ्यू के घर पुलिस कप्तान के पहँुचते ही वहाँ पर जमी भीड़ छटने लगी. ठाकुर महेन्द्र प्रताप सिंह उस कमरे में चले गए जहाँपर गुमसुम अंजलि और मौलवी साहब के अलावा मनोज के अलावा उनके आसपास के लोग बैठे हुए थे. पापा के आते ही अंजलि स्वंय को रोक नही सकी और दहाड़ मार कर रोने लगी. ”पापादेखा न मनोज का क्या हो गया…..? अपनी बेटी की आँखो में आँसू देख महेन्द्र प्रतापसिंह स्वंय को रोक नहीसके वे कुछ पुछते इसके पहले ही मौलवी साहब ने उन्हे चुपचाप रहने का इशारा कर दिया. पुलिस कप्तान साहब कमरे के एक कोने में बैठ कर वहाँ पर होने वाली गतिविधियोको देखने लगे. इस बार फिर मौलवी साहब ने गेहूँ के दानो को मनोज पर फेका तो आँखो में अंगारे लिए मनोज सोते से जाग गया. उसने सामने के मौलवी से तू चला जा नहीं तो बात बिगड़ जायेगी…….. मौलवी ने इस बार फिर कुछ बुदबुदाया और मनोज के चेहरे पर वह अभिमंत्रित पानी फेका तो वह जनानी आवाज में बोला मुझे छोड़ दो…………मौलवी साहब बोलें पहले तू यह तो बता आखिर तू है कौन………? तूने इसे क्यो अपने जाल में फँसा रखा है………..? इस बार मनोज के शरीर में समाई प्रेतात्मा बोली………….. मैंमरीयम हँू…………..सिस्टर जूली की छोटी बहन हँू. फादर डिसूजा ने मेरी सिस्टर जूली से मैरिज की थी. मैं अपनी सिस्टर के पास ही रहती थी. आज से 45 साल पहले मेर
ू. फादर डिसूजा ने मेरी सिस्टर जूली से मैरिज की थी. मैं अपनी सिस्टर के पास ही रहती थी. आज से 45 साल पहले मेरी चर्च कालोनी की इस सामने वाली बावली में गिरने की वजह से मौत हो गई थी. मेरी मौत लोगो के बीच काफी समय तक चर्चा का विषय बनी क्योकि फादर डिसूजाने मेरी मौत को आत्महत्या बताया था जिसे आसपास के लोग मानने को तैयार नही थे. उस समय मैं दसवी कक्षा में पढ़ती थी. कुंदन मैथ्यू फादर डिसूजा के घर पर ही रहता था इसलिए हम दोनो के बीच पता नहीकब प्यार का बीज अंकुरित हो गया. कुंदन के बचपन मेरी माता-पिता एक दुर्घटना में मारे गये थे . एक दिन फादर डिसूजा को भूखे से व्याकुल कुंदन एक होटल में चोरी करते मिला. फादर डिसूजा को कुंदन पर दया आ गई और उसने उसे पुलिस थाने से जमानत पर छुड़ा कर अपने पास ले आया. सात साल की उम्र से कुंदन फादर डिसूजा के पास ही रहता है. फादर डिसूजा ने कुंदन को ईसाई धर्म की दीक्षा देकर उसका नाम कुंदन मैथ्यू कर दिया. कुंदन ने भी फादर डसूजाको अपने माता- पिता की तरह चाह कर उसकी सेवा चाकरी में कोई कसर नही छोड़ी. फादर ने कुंदन का नाम सामने वाले चर्च स्कूल में लगा दिया. पढऩें में तेज कुंदन ने हर साल अव्वल नम्बर पर आकर पूरे शहर में अपने नाम की पहचान बना ली थी. इस बीच सिस्टर जूली ने चर्च स्कूल में बतौर टीचर के जब नियुक्त हुई तो वहभी कुंदन की पढ़ाई के प्रति लगन और क्लास तथा स्कूल में नम्बर वन आने की वजह से उस पर खास ध्यान देने लगी. सिस्टर जूली भी श्ुारूआती दिनो में चर्च कालानी में रहती थी लेकिन जब फादर डिसूजा से उसकी मैरीज हो गई तो वह अपनी छोटी बहन मरीयम के साथ रहने लगी. मरीयम भी कुंदन के साथ पढ़ती थी इसलिए दोनो साथ – साथ रहने और पढऩे के कारण एक दुसरे के हमजोली बन गये. सिस्टर जूली से मैरीज के बाद फादर डिसूजा का कुंदन के प्रति व्यवहार काफी बदल गया. कुंदन का स्कूल जाना बंद करवा दिया गया. उसे चर्च में चौ
. उसे चर्च में चौकीदार की नौकरी पर रखवाने के बाद फादर डिसूजा ने मरीयम की कुंदन से बातचीत तक बंद करवा दी. फादर डिसूजा नहीं चाहतें थे कि मरीयम की मैरीज एक ऐसे लड़के से हो जिसके माता- पिता न हो…… जिसके पास न घर है न दो वक्त की दो का इंतजाम ऐसे लड़के से मैरीज न होने देने की वजह कुछऔर ही थी. दर असल फादर मरीयम को पाना चाहते थे लेकिन सिस्टर जूली की वजह से उनकी दाल नही गल पा रही थी. एक दिन सिस्टर जूली और कुंदन किसी काम से दूर किसी शहर गये थे . उस रात को घर में अकेली देख फादर डिसूजा ने मरीयम की इज्जत लूटनी चाही तो वह अपनी जान बचाते समय ऐसी भागी की बावली में जा गिरी. मरीयम की अचानक मौत का सिस्टर जूली पर ऐसा सदमा पड़ा की वह अकसर बीमार पडऩे लगी और एक दिन चल बसी. फादर डिसूजा ने कई लोगो को मेरी मौत को आत्महत्या बताया लेकिन किसी ने भी उसकी बातो पर यकीन नही किया. मैने आखिर मेरी और मेरी सिस्टर जूली की मौत का बदला लेने के लिए मुझे मनोज का सहारा लेना पड़ा .
मैं मनोज को बस एक ही शर्त पर छोड़ सकती हँू यदि आप मेरी कब्र पर एक काला गुलाब वो भी मेरे और कुंदन के प्यार की निशानी बतौर लोगो के बीच लम्बे समय तक जाना – पहचाना जा सके. लोगो ने जूली की मनोज के माध्यम से कहीं बातो पर विश्वास करके एक काला गुलाब की कली की कहीं से व्यवस्था करके ज्यों ही उसकी कब्र पर गाड़ा इधर मनोज अपने – आप ठीकहो गया . आज भी कुंदन और जुली के प्यार का वह प्रतिक लोगो के लिए ऐसा सबक साबित हुआ है कि लोग कभी भी ऐसे प्रेमी के प्यार के बीच में खलनायक बनने का प्रयास नहीं करते जों एक दुसरे को जान से जयादाचाहते है. अभी कुछ दिनो पूर्वही अंजली अपने पति मनोज और पापा डी .आई .जी . ठाकुर महेन्द्र प्रताप सिंह के साथजब नागपुर जा रही थी तो वह छिन्दवाड़ा होते हुए जूली कीकब्रतक पहँुची यह जानने के लिए की उसके द्वाराा अकुंरितकाला गुलाब कैसा है………!
कथा के पात्र काल